क्षेत्र
आम जनता, समाज के फ़ायदे से जुड़े काम
उद्देश्य
YouTube सामग्री जेनरेट करें
जागरूकता बढ़ाएं
दानदाता ढूंढें
धनसंग्रह
चुनौती
Kiva दुनियाभर के कर्ज़ देने वाले और कर्ज़ लेने वाले लोगों को जोड़कर माइक्रोफ़ाइनेंस को व्यक्तिगत बनाती है. कर्ज़ लेने वाले ये लोग अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए कर्ज़ की तलाश करते हैं. Kiva इन लोगों के समूहों को जोड़ सके इसके लिए उन्हें संगठन में बढ़ोत्री करनी होती थी और अपने महत्वपूर्ण काम की जानकारी देनी होती थी.
कहानी
Kiva ने अपने संगठन का विज्ञापन करने के लिए Ad Grants का उपयोग शुरू किया, जो जल्दी ही उनकी वेबसाइट पर ऑनलाइन ट्रैफ़िक का सबसे बड़ा स्रोत बन गया. जब कोई संभावित कर्ज़दाता यह जानना चाहता है कि वह माइक्रोफ़ाइनेंस में किस तरह भाग ले सकता है, तब Kiva अत्यधिक पात्रता वाली लीड जेनरेट कर सकती है. Kiva ऐसे लोगों का पता लगा सकती है जो उसके मिशन में पहले से रुचि रखते हैं और पहले से ही उसके जैसे किसी संगठन में शामिल होना चाहते हैं.
Kiva ने अपने समुदाय को सक्रिय करने के लिए YouTube का भी उपयोग किया है ताकि वह अपने साथियों, स्वयंसेवकों और उपयोगकर्ता समुदाय को हर दिन YouTube वीडियो बनाने और उन्हें अपलोड करने के लिए प्रेरित कर सके.
“Google और Google के वे टूल जिनका हम Kiva में हर दिन उपयोग करते हैं, उनसे हम दुनियाभर के 2.1 से भी ज़्यादा किसानों, उद्यमियों और विद्यार्थियों की सहायता कर पाए हैं जो अपने सपनों को पूरा करने का काम कर रहे हैं.”
बकली व्हाइट, उत्पाद विपणन प्रमुख, Kiva
प्रभाव
सिंथिया, जो ज़िम्बाब्वे में खेती करती हैं और दो बच्चों का अकेले ही पालन-पोषण करती हैं, उन्होंने देश में सूख के मौसम में अपनी फ़सल को हराभरा रखने के लिए Kiva के कर्ज़ का उपयोग किया.
सिंथिया ने सिंचाई के एक तालाब को भिंडी, शकरकंद और भुट्टे के अपने खेतों से जोड़ लिया, जो पाइप और पानी के पंप के सिस्टम से जुड़ा हुआ था. दुनियाभर के 35 कर्ज़दाताओं की सहायता से मिले $1,000 के Kiva कर्ज़ ने पंप को चलाने लायक बिजली खरीदने और उनकी फ़सलों को हरा-भरा रखने में सहायता की.
वह खेती से होने वाले लाभ में से कुछ का उपयोग अपने बच्चों को पढ़ाने में उपयोग करती हैं और खुद भी पढ़-लिख रही हैं. उन्हें किशोरावस्था में ही स्कूल छोड़ना पड़ा था, लेकिन वह अपने बच्चों और दूसरी युवा लड़कियों के लिए एक अच्छा उदाहरण रखते हुए हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के लिए काम कर रही हैं.
सिंथिया कहती हैं, “शिक्षा बिना जीवन ऐसा ही है जैसे पानी बिना पौधा. इसलिए मैं अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रतिबद्ध हूं, चाहे कुुुछ भी हो जाए”.